कुंभ मेला 2019 : पौष पूर्णिमा पर स्नान करते समय करें इस मंत्र का जाप! पूरी होगी हर मनोकामना…

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Kumbh Mela 2019: Chant this mantra while bathing at Paush Purnima. Every wish will be fulfilled (21 जनवरी, 2019) : पुराणों के अनुसार ‘भारत’ की आत्मा तीर्थों में निवास करती है. जैसा कि हम जानते हैं पृथ्वी पर बहुत से तीर्थों में नदी तीर्थ का अपना विशेष महत्व होता है. भारत में नदियों को ‘माता’ के रूप में पूजा जाता है. एक पावन तिथि पर एक विशेष घड़ी में इन नदियों में स्नान का विशेष महत्व बताया गया है. नदी तीर्थ पर स्नान करते समय इस मंत्र का जाप करना चाहिए. इसका जाप करने से सभी मनोकामना को पूर्ण होते हुए हुआ मोक्ष प्रदान करता है.

कुंभ मेला 2019 : पौष पूर्णिमा पर स्नान करते समय करें इस मंत्र का जाप! पूरी होगी हर मनोकामना...

गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती।
नर्मदे सिन्धु कावेरी जले अस्मिन् सन्निधिम् कुरु।।

किसी भी पवित्र नदी में स्नान करते समय इस दिव्य मंत्र का जाप करने से सभी तरह के कार्यों में सफलता मिलती है. 

पौष पूर्णिमा पर गंगा स्नान 

इस बात को हम भलीभांति जानते हैं कि ‘प्रयागराज’ में ‘कुंभ मेला’ लगा हुआ है. इस दौरान त्रिवेणी संगम में ‘पौष पूर्णिमा’ पर स्नान-ध्यान का विशेष फलदायी होता है. इसी लिए इस पावन तिथि पर मोक्ष की कामना लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां गंगा में डुबकी लगाते हैं. माना जाता है कि इस शुभ तिथि पर इस पावन नदी में डुबकी लगाने वाले को पतित पावनी ‘मां गंगा’ सभी पापों से मुक्त करते हुए अक्षय पुण्य प्रदान करती हैं.

कुंभ मेला 2019 : पौष पूर्णिमा पर स्नान करते समय करें इस मंत्र का जाप! पूरी होगी हर मनोकामना...

मां गंगा का मंत्र

पौष पूर्णिमा पर स्नान करते समय ‘मां गंगा’ की कृपा और पापों से मुक्ति पाने के लिए इस विशेष मंत्र का पाठ अवश्य करें। श्रद्धा एवं भक्ति के साथ इस मंत्र का जाप पापों से मुक्त करता हुआ जीवन को मंगलमय बनाता है.

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“गंगागंगेति योब्रूयाद् योजनानां शतैरपि ।
मुच्यते सर्व पापेभ्यो विष्णुलोकं सगच्छति । तीर्थराजाय नमः”

कुंभ मेला 2019 : पौष पूर्णिमा पर स्नान करते समय करें इस मंत्र का जाप! पूरी होगी हर मनोकामना...

केवल दर्शन करने से ही मिलता है मोक्ष

मान्यता यह है कि तन और मन को पवित्र करने वाली मां गंगा नदी में स्नान का तो विशेष फल प्राप्त होता है, केवल दर्शन से ही साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं. यही कारण है कि इसीलिए पुण्यसलिला मां गंगा को लेकर कहा भी गया है — गंगे तव दर्शनात् मुक्ति।

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