शंख बजाने से स्वास्थ्य को होते हैं ये लाभ! इन गंभीर बीमारियों से मिलता है छुटकारा…

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Playing conchs for health is beneficial! This is the importance of conch (1 फ़रवरी, 2019) : शास्त्रों के अनुसार हिन्दू धर्म में ‘शंख’ को बहुत ही पवित्र और शुभ माना जाता है. मान्यता यह है कि  शंख की उत्पत्ति समुद्र से हुई. समुद्र मंथन के दौरान मिले 14 रत्नों में से छठवां रत्न शंख था. ‘विष्णु पुराण’ के अनुसार ‘माता लक्ष्मी’ समुद्र की पुत्री हैं और शंख उनके भाई है. यही कारण है कि जिस घर पर शंख होता है वहां पर माता लक्ष्मी का वास जरूर होता है.

शंख बजाने से स्वास्थ्य को होते हैं ये लाभ! इन गंभीर बीमारियों से मिलता है छुटकारा...
शंख

हिन्दू धर्म में मांगलिक कार्यो, विवाह, धार्मिक अनुष्ठानों और रोजाना पूजा-पाठ में शंख बजाने का नियम है. घर के पूजा वाले स्थान में शंख रखना बेहद शुभ माना जाता है.शंख रखने और बजाने का न सिर्फ धार्मिक महत्व है बल्कि वैज्ञानिक महत्व भी है. विज्ञान की माने तो शंख की ध्वनि से वातावरण शुद्ध होता है. आइए जानते हैं शंख का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व…

विज्ञान के नजरिए से महिलाओं को गर्भावस्था के दौरन शंख नहीं बजाना चाहिए। शंख बजाने से गर्भ पर दबाव पड़ता है।

मान्यता यह भी है कि हर रोज शंख बजाने से व्यक्ति के शरीर पर अनुकूल प्रभाव पड़ता है. विशेषकर फेफड़ों से संबंधित रोग के लिए शंख बजाना बहुत ही लाभदायक होता है. आयुर्वेद के अनुसार शंख बजाने से ‘दमा, कास प्लीहा, यकृत और इंफ्लूएंजा’ नामक रोगों से मुक्ति मिलती है. इससे किडनी और जननांगों पर भी अनुकूल प्रभाव पड़ता है.

शंख बजाने से स्वास्थ्य को होते हैं ये लाभ! इन गंभीर बीमारियों से मिलता है छुटकारा...

शास्त्रों में बताया गया है कि शंखघोष से निकलने वाली ओम का नाद मानसिक रोगों से निजत दिलाता है. इससे कुंडलिनी जागरण की शक्ति भी विकसित होती है. ‘शंखनाद’ से शरीर और आस-पास के वातावरण शुद्ध होता है और सतोगुण की वृद्धि होती है.

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जैसा कि बताया गया शंख बजाना शुभ माना जाता है परंतु कुछ समय ऐसे हैं जब शंख नहीं बजाना चाहिए. शास्त्रों के अनुसार रात में संध्या आरती के बाद शंख नहीं बजाना चाहिए. इससे लक्ष्मी नाराज होती है और आर्थिक नुकसान होता है.

अक्सर हम देखते हैं कि बहुत से बच्चों को बोलने में परेशानी आती है. इसके लिए उनकी वाणी संबंधी दिक्कतों से छुटकारा पाने के लिए बच्चे को शंख में पानी भरकर पिलाना बेहद लाभदायक होता है.

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इसके अलावा यदि किसी वजह से संतान सुख में बाधा आ रही है तो नियमित दक्षिणवर्ती शंख में दूध भरकर ‘शालिग्राम’ को स्नान करना चाहिए. साथ ही इस दूध को प्रसाद के रूप में पत्नी को पिलाएं. कहा जाता है कि ऐसा करने से संतान प्राप्ति में आने वाली बाधा से छुटकारा मिलता है. व्यक्ति को संतान सुख प्राप्त होता है.

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