श्राद्ध अमावस्या : 9 अक्टूबर को सर्वपितृ कृष्ण अमावस्या, गलती से भी न करें ये काम

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Shraddha Amavasya: On 9th October, all-pervading Krishna Amavasya, do not do it by mistake (3 अक्टूबर, 2018) : हिन्दू शास्त्रों के अनुसार आश्विन माह की ‘कृष्ण अमावस्या’ को सर्वपितृ ‘श्राद्ध अमावस्या’ कहा जाता है. यह दिन ‘पितृपक्ष’ का आखिरी दिन माना जाता है. इस दिन जो श्राद्ध किया जाता है वह पितृदोषों से मुक्ति दिलाता है. इसके अलावा अगर कोई श्राद्ध में तिथि विशेष को किसी कारण से श्राद्ध न कर पाया हो या फिर श्राद्ध की तिथि मालूम न हो तो सर्वपितृ श्राद्ध अमावस्या पर श्राद्ध किया जा सकता है. इस बार यह मंगलवार 9 अक्टूबर को है. पितृ पक्ष का यह आखिरी दिन होता है ऐसे में इस दिन कुछ विशेष बातों का ध्यान रखा जाता है जिससे पितृपक्ष का पूरा लाभ मिलता है और तमाम तरह के दोषों से मुक्ति भी मिलती है.

श्राद्ध अमावस्या : 9 अक्टूबर को सर्वपितृ कृष्ण अमावस्या, गलती से भी न करें ये काम
श्राद्ध अमावस्या

श्राद्ध पक्ष के आखिरी दिन पूरे 16 दिनों तक श्राद्ध कर्म करने वाले व्यक्ति को न तो पान खाना चाहिए और ना ही शरीर पर तेल लगाना चाहिए.

बिना संकल्प के कभी भी श्राद्ध पूरा नहीं माना जाता इसलिए श्राद्ध के अंतिम दिन हाथ में अक्षत, चंदन, फूल और तिल लेकर पितरों का तर्पण करना चाहिए. 

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श्राद्ध पक्ष के समय और विशेषतौर पर अंतिम दिन दूसरे शहर की यात्रा नहीं करनी चाहिए. इसके अलावा न तो गुस्सा करना चाहिए.

श्राद्ध अमावस्या : 9 अक्टूबर को सर्वपितृ कृष्ण अमावस्या, गलती से भी न करें ये काम

पितरों की कृपा पाने के लिए श्राद्ध के अंतिम दिन ब्राह्मणों और गरीबों को भोजन कराने का खास नियम है. इसके अलावा पितृदोषों से मुक्ति के लिए दान अवश्य करें.

श्राद्ध में चना, मसूर, उड़द, सत्तू, मूली, काला जीरा, खीरा, काला नमक, काला उड़द, बासी या अपवित्र फल या अन्न उपयोग नहीं किया जाता.

श्राद्ध कर्म में तिल और कुशा का होना जरूरी है. साथ ही भोजन बनाने में किसी प्रकार के लोहे के बर्तनों का प्रयोग नहीं करना चाहिए.

श्राद्ध अमावस्या : 9 अक्टूबर को सर्वपितृ कृष्ण अमावस्या, गलती से भी न करें ये काम

श्राद्ध पक्ष में अपने पितरों को तर्पण करते हुए हमेशा आपका मुंह दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए.

श्राद्ध में किसी प्रकार की तामसिक वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए और न ही नशे का सेवन करना चाहिए.

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