हिन्दू धर्म में आखिर क्यों लगाया जाता है माथे पर तिलक? जानिए इससे जुड़ी ये धार्मिक प्रथा…

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Why is it used in Hindu religion, Tilak on the forehead? Know the religious practice associated with this (27 अक्टूबर, 2018) : इस बात को हम भलीभांति जानते हैं कि भारतीय परंपरा के अनुसार ‘हिन्दू’ धर्म में लोग ‘तिलक’ लगाते है. अक्सर हम यह भी देखते हैं कि अधिकतर लोग हमेशा तिलक लगाकर रखते है. लेकिन क्या आप इस बात को जानते हैं कि तिलक क्यों लगाया जाता है और इसके पीछे क्या महत्त्व है.

हिन्दू धर्म में आखिर क्यों लगाया जाता है माथे पर तिलक? जानिए इससे जुड़ी ये धार्मिक प्रथा....

माथे पर तिलक या टीके लगाने का महत्व

हिन्दू मान्यताओं के अनुसार भारतीय परंपरा में तिलक या टीका लगाना आवश्यक धर्मकृत्य है. धर्मकृत्यों के नियामक ‘ऋषि’ एक साथ वैज्ञानिक और दार्शनिक भी थे. यही कारण है कि किसी भी प्रचलन की स्थापना में दोनों दृष्टियों को ध्यान में रखा गया. मान्यता यह भी है कि तिलक हमेशा भ्रूमध्य या आज्ञाचक्र के स्थान पर लगाया जाता है. शरीर शास्त्र की दृष्टि से यह स्थान ‘पीनियल ग्रंथि’ का है. इसका प्रकाश से इसका गहरा संबंध है. एक प्रयोग में जब किसी की आंखों पर पट्टी बांधकर, सिर को ढक दिया गया और उसकी पीनियल ग्रंथि को उद्दीप्त किया गया, तो उसे मस्तक के भीतर प्रकाश की अनुभूति हुई.

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साथ ही यह भी मान्यता है कि ध्यान-धारणा के समय साधक के चित्त में जो प्रकाश अवतरित होता है, उसका संबंध इस स्थूल अवयव से अवश्य है और दोनों भौंहों के बीच कुछ संवेदनशीलता होती है.

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तिलक लगाना

अगर हम अपनी आंखे बंद करके बैठ जाएं और और कोई व्यक्ति भ्रूमध्य के निकट ललाट की ओर तर्जनी उंगुली लेकर जाए, तो कुछ अलग-सा अनुभव होने लगता है. ऐसा होना ‘तृतीय नेत्र’ की प्रतीति है. इसे अपनी उंगुली भृकुटि-मध्य लाकर भी अनुभव कर सकते हैं. यही कारण है कि जब इस स्थान पर तिलक या टीका लगाया जाता है, तो उससे आज्ञाचक्र को नियमित स्फुरण मिलती रहती है.

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