विश्वकर्मा जयंती 2018 : भगवान विशकर्मा की जयंती प्रत्येक वर्ष 17 सितंबर को ही क्यों मनाई जाती है! जानिए इसका महत्व

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14 सितंबर, 2018 : इस बात को हम भलिभांति जानते हैं कि हर साल 17 सितंबर को ‘भगवान विश्वकर्मा’ की जयंती का पर्व मनाया जाता है. वैसे तो हिन्दू धर्म में हर पर्व और व्रत तिथि के अनुसार ही मनाया जाता है, परंतु विश्वकर्मा पूजा के लिए हर साल एक निश्चित तारीख यानी 17 सितंबर क्यों होती है?

Why is the birth anniversary of Lord Vishakarma celebrated every year on September 17
भगवान विश्वकर्मा

हिन्दू धर्म के अनुसार भगवान विश्वकर्मा की जयंती को लेकर कुछ मान्यताएं हैं. ज्योतिषाचार्यो के अनुसार भगवान विश्वकर्मा का जन्म आश्विन कृष्णपक्ष का प्रतिपदा तिथि को हुआ था, दूसरी तरफ कुछ लोग मानते हैं कि भाद्रपद की अंतिम तिथि को भगवान विश्वकर्मा की पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ होता है.

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वैसे विश्वकर्मा पूजा ‘सूर्य’ के पारगमन के आधार पर तय किया जाता है. भारत में कोई भी ‘तीज व्रत’ और त्योहारों का निर्धारण चंद्र कैलेंडर के मुताबिक किया जाता है, परंतु विश्वकर्मा पूजा की तिथि सूर्य को देखकर ही की जाती है. जिसके कारण यह पर्व प्रत्येक वर्ष 17 सितंबर को मनाया जाता है. 
Why is the birth anniversary of Lord Vishakarma celebrated every year on September 17

भगवान विश्वकर्मा निर्माण के देवता हैं

ऐसा भी माना जाता है कि पौराणिक काल में देवताओं के अस्त्र-शस्त्र और महलों का निर्माण भगवान विश्वकर्मा ने ही किया था. भगवान विश्वकर्मा को निर्माण और सृजन का देवता भी माना जाता है. भगवान विश्वकर्मा ने सोने की लंका, पुष्पक विमान, इंद्र का व्रज, भगवान शिव का त्रिशूल, पांडवों के लिए इंद्रप्रस्थ नगर और भगवान कृष्ण की नगरी द्वारिका का निर्माण किया था.

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सोने की लंका

भगवान विश्वकर्मा को शिल्प में गजब की महारथ हासिल थी जिसके कारण इन्हें ‘शिल्पकला का जनक’ भी कहा जाता है. इसके अलावा इस समस्त ‘ब्रह्मांड’ की रचना भी भगवान विश्वकर्मा जी ने ही की है. इस दिन देश के विभिन्न राज्यों में, खासकर औद्योगिक क्षेत्रों, फैक्ट्रियों, लोहे की दुकान, वाहन शोरूम, सर्विस सेंटर आदि में पूजा की जाती है. 

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