दिल्ली की शोख शातिर ‘तान्या‘ ने पाया एशियाई स्तर

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नई दिल्ली, 20 अगस्त – चौसठ खानों के खेल में एशियाई चैंपियन रह चुकी तान्या सचदेव का जन्म 20 अगस्त, 1986 में हुआ था। उनकी मां अंजु ने उन्हें 6 साल की उम्र में शतरंज के गुर बताए थे। कई खेलों में पारंगत तान्या ने दिल से शतरंज को अपनाया और सतत् अभ्यास शूरू कर दिया। परिणामस्वरूप 8 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपना पहला अंतर्राष्ट्रीय शतरंज खिताब पाया। वर्ष 2005 में महिला ग्रैंड मास्टर का दर्जा पाया। वर्ष 2008 में अंतर्राष्ट्रीय मास्टर्स का दर्जा हासिल किया। वर्ष 2013 में उनके श्रेष्ठतम ईएलओ अंक (2443) थे।

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दिल्ली की शोख शातिर ‘तान्या‘ ने पाया एशियाई स्तर

तान्या सचदेव को महत्वपूर्ण सफलता अंडर-12 का राष्ट्रीय चैंपियन बनकर मिली थी। वर्ष 1998 में उन्होंने विश्व अंडर-12 में कांस्य हासिल किया। 2000 में एशियाई अंडर-14 गर्ल्स चैंपियन बनी। फिर 2002 में एशियाई अंडर-20 गर्ल्स चैंपियन बनने का गौरव पाया। वर्ष 2006 व 2007 में उन्होंने राष्ट्रीय सीनियर खिताब हासिल किये। वर्ष 2007 में उन्होंने ईरान में हुई एशियन महिला खिताब (सीनियर) जीतकर महत्वपूर्ण सफलता दर्ज की। इस सफलता से उन्हें 2009 में अर्जुन पुरस्कार दिया गया।
वर्ष 2009 व 2010 में हुई चैस ओलंपियाड में तीसरे बोर्ड का कांस्य जीता। यह स्पर्धा इंस्ताबुल में हुई थी। मॉडर्न स्कूल बसंत विहार से पढ़कर उन्होंने वैंकटेश्वर कालेज से ग्रेजुएशन की। उनको रेड बुल ने सेंसरशिप दी हुई है। नवंबर 2014 में उन्होंने व्यवसायी विराज कटारिया से शादी की। शादी में हिंदू विधि व सिख रिति-रिवाजों को दोहरे रूप में अपनाया था।
खेल में तान्या अब पुनः सक्रिय हो रही हैं। साथ ही सामाजिक गतिविधियों व शो बाजी में भी पीछे नहीं रहना चाहती। जुलाई 2016 के अंत में हुई प्रो कबड्डी की शूरूआत में भरे स्टेडियम में तान्या को राष्ट्रीय गान गा कर बहुत सुकून मिला। शातिर तान्या जीवन के विभिन्न रंगों में पारंगत होने की भरपूर कोशिश में है।

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