सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर उच्चतम न्यायालय के फैसले का विरोध! ये है बड़ी वजह…

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Opposition of Supreme Court verdict on women’s admission in Sabarimala temple (तिरुवनंतपुरम) : केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम से करीब 175 किमी की दूरी पर पंपा है और वहाँ से चार-पांच किमी की दूरी पर पश्चिम घाट से सह्यपर्वत श्रृंखलाओं के घने वनों के बीच, समुद्रतल से लगभग 1000 मीटर की ऊंचाई पर ‘सबरीमाला मंदिर’ स्थित है. सूत्रों की माने तो इस मंदिर में मान्यता के अनुसार वहां 10 से 50 वर्ष उम्र की महिलाओं का प्रवेश वर्जित है.

सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर उच्चतम न्यायालय के फैसले का विरोध! ये है बड़ी वजह...
सबरीमाला मंदिर

जानकारी के अनुसार आपको बता दें कि मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर ‘उच्चतम न्यायालय’ के फैसले के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शन रुकने का नाम नहीं ले रहा है. इस मामले में बीती 28 सितंबर को पांच जजों की संविधान पीठ ने सभी उम्र की महिलाओं को सबरीमाला मंदिर में प्रवेश का अधिकार दे दिया था.

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रविवार 14 अक्टूबर को इस मामले को लेकर पंडलाम के पूर्व राजपरिवार के प्रमुख ‘केरल वर्मा राजा’ ने कहा है कि सबरीमाला मंदिर पर उच्चतम न्यायालय का फैसला श्रद्धालुओं के विरुद्ध है और ‘केंद्र सरकार’ को अनुयायियों के अधिकारों की रक्षा के लिए जरुरी संशोधन करना चाहिए.

सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर उच्चतम न्यायालय के फैसले का विरोध! ये है बड़ी वजह...
सुप्रीम कोर्ट

सूत्रों की माने तो पंडलाम राजपरिवार का सबरीमाला के मुख्य देवता ‘भगवान अयप्पा’ की किवदंतियों से रिश्ता रहा है. मंदिर में नवंबर-जनवरी के बीच वार्षिक मंडलम उत्सव के दौरान राजपरिवार का प्रमुख कुछ खास अनुष्ठान करने का विशेषाधिकार रखता है.

इसके आगे उन्होंने कहा है कि ‘पंडलाम राजपरिवार सबरीमाला मंदिर के कुछ अधिकारों और परंपराओं का पालन करता है. जहां तक फैसले का सवाल है तो यह श्रद्धालुओं के विरुद्ध है. हम उसके खिलाफ उच्चतम न्यायालय गए हैं, हम इस याचिका पर नतीजे का विश्लेषण करके उपयुक्त कदम उठायेंगे.’

ध्यान देने वाली बात यह है कि उच्चतम न्यायालय के 28 सितंबर के फैसले के खिलाफ अयप्पा धर्मा प्रोटेक्शन कमेटी के विरोध मार्च में शामिल होने के लिए आए थे. उन्होंने अपील करते हुए कहा कि केंद्र शीर्ष अदालत के फैसले के खिलाफ कानून में जरुरी संशोधन करे.

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सूत्रों की माने तो उच्चतम न्यायालय के फैसले के खिलाफ पिछले कई दिनों से प्रदर्शन चल रहा है. न्यायलय के फैसले के विरोध में महिलाएं और कई संगठन सड़कों पर उतर के विरोध कर रहे हैं.

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